ब्लागवाणी का बंद होना, मानो सभी सम्पर्को पर ताले लग जाने जैसा है। जब तक कुछ ताजा पढ़ा-लिखी ना कर ले तब तक खाना भी हजम नही होता। ऐसा बहुतों का हाल है। ब्लागवाणी का बंद होना अब अखरने की हद तक आ पहुंचा है। इतना ही नही इसकी सुगबुगाहटे अब सुर्खियों का हिस्सा भी बनने लगी है। प्रस्तुत है, प्रख्यात पत्रकार मनविदंर भिम्बर जी दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित फीचर कथा, जो बता रही है आखिर क्या वजह रही है ब्लागवाणी के बंद होने की।
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ब्लागवाणी का बंद होना
ब्लागवाणी का बंद होना, मानो सभी सम्पर्को पर ताले लग जाने जैसा है। जब तक कुछ ताजा पढ़ा-लिखी ना कर ले तब तक खाना भी हजम नही होता। ऐसा बहुतों का हाल है। ब्लागवाणी का बंद होना अब अखरने की हद तक आ पहुंचा है। इतना ही नही इसकी सुगबुगाहटे अब सुर्खियों का हिस्सा भी बनने लगी है। प्रस्तुत है, प्रख्यात पत्रकार मनविदंर भिम्बर जी दैनिक हिन्दुस्तान में प्रकाशित फीचर कथा, जो बता रही है आखिर क्या वजह रही है ब्लागवाणी के बंद होने की।
हिन्दी ब्लॉगिंग के 10 सबसे बड़े खतरें
हिन्दी ब्लागिंग तेजी से अपने कदम बड़ा रही है, लेकिन कुछ ऐसी बातें भी हो जो सबसे लिये समस्या बनकर आयी है, प्रस्तुत है, ऐसी ही 10 बातें।
1-बेनामी एक ( anonymous) बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। ये जिधर चाहे मुंह मार देता है, कोई इसको रोकने-टोकने वाला नही है। इनको पकड़ने का अभी तक कोई पक्का इंतजाम नही है, ब्लॉगर आलोचना का स्वागत कर सकते है, लेकिन गालियों और बदतामिजी का नहीं। (बेनामी कोई और नहीं हैं, हम खुद ही चेहरा बदलकर एक-दूसरे को कोसते है)
2-हम लोग धड़ाधड़ लिखने पर उतारू हो गए है, लगातार पोस्टों पर पोस्टे दे रहे है, लेकिन सामूहिक रूप से हमारी फ्रिक ये बिल्कुल नही है कि हमें हमारे ब्लॉग से भी कुछ आमदनी होनी चाहिये, ये भी एक खतरा है, क्योकि अपने ब्लॉग पर हर कोई अपना बेस्ट देता है, जिसका उसे कुछ ना कुछ मेहनताना मिलना ही चाहिये।
3-लोगों को लिखने से मतलब, क्या लिखा, कुछ भी जो दिमाग में आया, फिर हम कहते है- अरे फलां का ब्लॉग बड़ा अच्छा चल रहा है, उस पर बहुत भीड़ रहती है, हमें अपने लेखन के जरिये अपने आप को ब्रांड में बदलना आना चाहिये। तभी हम अपना मजबूत पाठक वर्ग तैयार कर सकगें। (याद रखना ज्यादा टिप्पणीयां और प्रशंसक किसी के अच्छा लिखने की गांरटी नही है, बल्कि ये चापलूसी और टिप्पणी के बदले टिप्पणी वाला सिस्टम भी होता है।)
4. कुएं के मेढ़क बने रहना, हमेशा ही, प्रत्येक पोस्ट में एक सा लिखते रहना, चाहे वो सरकार को कोसना हो, हिन्दूव का ढोल पीटना हो, आंतकवाद की दुहाई हो। या इसके आस-पास जैसा कुछ। इससे बचे! ये आपके वातावरण और पालनपोषण को उजागर करता है।
5. ऐसे कई ब्लॉगर प्रकाश में आए है, जो तीन-तीन, चार-चार घटें के अतंराल से लगातार पोस्टे देते है। उनकी पोस्टों को पढ़ने वालो की कुल जमा-पूंजी चार या पांच लोग। (ये फिर भी बाज नही आते) ये एक दिन ब्लॉगिंग को फ्री से निकाल कर पैसों की करवाकर ही बाज आएगे।
6-सर्कीण मानसिकता वाले ब्लॉगरों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। धर्म को बचाने का ठेका इन्होने ही लिया हुआ है। अपनी घटिया बयानबाजी और एकतरफा लेखन से ब्लॉगिंग को प्रदूषित करने वाले ब्लॉगर भी बड़े खतरों में से एक है।
7- पुराने पुरोधाओं की गुम होती पहचान- अब तो काफी ब्लॉगर हो गए है, लेकिन कभी इस क्षेत्र के खिलाड़ी कोई और ही थे, एक ब्लॉगर जो पुणे में रहते है, तकनीकी विषेषज्ञ है, बड़ी गालियां बक रहे थे- हमने इतना कुछ किया हिन्दी ब्लॉगिंग को पहचान दिलायी, और आज हम ही गायब से हो गए। हमें इन लोगों को भी याद करना चाहिये, ये लोग भी हिन्दी ब्लॉगिंग के ब्लेक एण्ड व्हाइट दौर के नायक हुआ करते थे कभी।
8- अगर कोई किसी का मेटर उठा लेता है, तब हम क्या कर सकते है, ऐसा कोई प्रावधान नही है, क्योंकि यहां पर अधिकांशत लिखने वाले नॉन प्रोफेशनल है, कहीं छप नही पाए है, अगर आपके लेखन का कोई इस्तेमाल करे तो ये अच्छी बात है बशर्ते आपको भी उसका लाभ मिलना चाहिये।
1-बेनामी एक ( anonymous) बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। ये जिधर चाहे मुंह मार देता है, कोई इसको रोकने-टोकने वाला नही है। इनको पकड़ने का अभी तक कोई पक्का इंतजाम नही है, ब्लॉगर आलोचना का स्वागत कर सकते है, लेकिन गालियों और बदतामिजी का नहीं। (बेनामी कोई और नहीं हैं, हम खुद ही चेहरा बदलकर एक-दूसरे को कोसते है)
2-हम लोग धड़ाधड़ लिखने पर उतारू हो गए है, लगातार पोस्टों पर पोस्टे दे रहे है, लेकिन सामूहिक रूप से हमारी फ्रिक ये बिल्कुल नही है कि हमें हमारे ब्लॉग से भी कुछ आमदनी होनी चाहिये, ये भी एक खतरा है, क्योकि अपने ब्लॉग पर हर कोई अपना बेस्ट देता है, जिसका उसे कुछ ना कुछ मेहनताना मिलना ही चाहिये।
3-लोगों को लिखने से मतलब, क्या लिखा, कुछ भी जो दिमाग में आया, फिर हम कहते है- अरे फलां का ब्लॉग बड़ा अच्छा चल रहा है, उस पर बहुत भीड़ रहती है, हमें अपने लेखन के जरिये अपने आप को ब्रांड में बदलना आना चाहिये। तभी हम अपना मजबूत पाठक वर्ग तैयार कर सकगें। (याद रखना ज्यादा टिप्पणीयां और प्रशंसक किसी के अच्छा लिखने की गांरटी नही है, बल्कि ये चापलूसी और टिप्पणी के बदले टिप्पणी वाला सिस्टम भी होता है।)
4. कुएं के मेढ़क बने रहना, हमेशा ही, प्रत्येक पोस्ट में एक सा लिखते रहना, चाहे वो सरकार को कोसना हो, हिन्दूव का ढोल पीटना हो, आंतकवाद की दुहाई हो। या इसके आस-पास जैसा कुछ। इससे बचे! ये आपके वातावरण और पालनपोषण को उजागर करता है।
5. ऐसे कई ब्लॉगर प्रकाश में आए है, जो तीन-तीन, चार-चार घटें के अतंराल से लगातार पोस्टे देते है। उनकी पोस्टों को पढ़ने वालो की कुल जमा-पूंजी चार या पांच लोग। (ये फिर भी बाज नही आते) ये एक दिन ब्लॉगिंग को फ्री से निकाल कर पैसों की करवाकर ही बाज आएगे।
6-सर्कीण मानसिकता वाले ब्लॉगरों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। धर्म को बचाने का ठेका इन्होने ही लिया हुआ है। अपनी घटिया बयानबाजी और एकतरफा लेखन से ब्लॉगिंग को प्रदूषित करने वाले ब्लॉगर भी बड़े खतरों में से एक है।
7- पुराने पुरोधाओं की गुम होती पहचान- अब तो काफी ब्लॉगर हो गए है, लेकिन कभी इस क्षेत्र के खिलाड़ी कोई और ही थे, एक ब्लॉगर जो पुणे में रहते है, तकनीकी विषेषज्ञ है, बड़ी गालियां बक रहे थे- हमने इतना कुछ किया हिन्दी ब्लॉगिंग को पहचान दिलायी, और आज हम ही गायब से हो गए। हमें इन लोगों को भी याद करना चाहिये, ये लोग भी हिन्दी ब्लॉगिंग के ब्लेक एण्ड व्हाइट दौर के नायक हुआ करते थे कभी।
8- अगर कोई किसी का मेटर उठा लेता है, तब हम क्या कर सकते है, ऐसा कोई प्रावधान नही है, क्योंकि यहां पर अधिकांशत लिखने वाले नॉन प्रोफेशनल है, कहीं छप नही पाए है, अगर आपके लेखन का कोई इस्तेमाल करे तो ये अच्छी बात है बशर्ते आपको भी उसका लाभ मिलना चाहिये।
9- कुछ सालों में ही हिन्दी ब्लॉगिंग की फिजा बदलने वाली है, दस-बीस हजार नही, लाखों की संख्या में ब्लॉगर लिख रहे होगे। आपका क्या होगा। कैसे टिकोगे, कभी सोचा है, अभी तो मजे की मिल रही है,
10- सबसे महत्वपूर्ण बात! आपने ब्लॉगिंग करते हुए किसी को क्या दिया। आप सिर्फ बकवास ही लिखते है, या कुछ बदलाव लाने वाला भी लिखते है, ऐसा कुछ जिसे पढ़कर पाठक प्रेरित हो, स्फुर्ति महसूस करे। (हिन्दी ब्लॉगिंग में अगर 13 हजार ब्लॉग है तो इनमें तीन प्रकार के ब्लॉग सर्वाधिक है, पहले वे लोग जो कविताए लिखते है, यहां कवियो और कवित्रियों की भरमार है, कविताएं भी ऐसी आदमी पढ़कर आत्महत्या की सोचने लगें। दूसरे जो सलाह देने वाले लोग है, देश ऐसे चलना चाहिये, नीतियां ऐसी होनी चाहिये, प्रधानमंत्री को ये करना चाहिये, इसने ये गलत कर दिया, मैंने ये सही कर दिया। दुनिया की सारी चिंताओं का हल इनके पास है, सिवा खुद के। तीसरे नम्बर पर वे ब्लॉगर सर्वाधिक है जो पत्रकार हुए जा रहे है, जिसको देखो वो यहां पत्रकार हुआ जाता है, अगर नही है, तो भी खुद को कहेगा जरूर। यहां क्या पत्रकारिता की डिग्रीयां बट रही है)
10- सबसे महत्वपूर्ण बात! आपने ब्लॉगिंग करते हुए किसी को क्या दिया। आप सिर्फ बकवास ही लिखते है, या कुछ बदलाव लाने वाला भी लिखते है, ऐसा कुछ जिसे पढ़कर पाठक प्रेरित हो, स्फुर्ति महसूस करे। (हिन्दी ब्लॉगिंग में अगर 13 हजार ब्लॉग है तो इनमें तीन प्रकार के ब्लॉग सर्वाधिक है, पहले वे लोग जो कविताए लिखते है, यहां कवियो और कवित्रियों की भरमार है, कविताएं भी ऐसी आदमी पढ़कर आत्महत्या की सोचने लगें। दूसरे जो सलाह देने वाले लोग है, देश ऐसे चलना चाहिये, नीतियां ऐसी होनी चाहिये, प्रधानमंत्री को ये करना चाहिये, इसने ये गलत कर दिया, मैंने ये सही कर दिया। दुनिया की सारी चिंताओं का हल इनके पास है, सिवा खुद के। तीसरे नम्बर पर वे ब्लॉगर सर्वाधिक है जो पत्रकार हुए जा रहे है, जिसको देखो वो यहां पत्रकार हुआ जाता है, अगर नही है, तो भी खुद को कहेगा जरूर। यहां क्या पत्रकारिता की डिग्रीयां बट रही है)
इरफान ब्लागिंग करते है दूसरों को कुछ देने के लिए।
आप कभी कम्यूनिस्ट रहे हैं। अगर कम्यूनिज्म को आपने जाना हो, हिन्दी, अग्रेज़ी, उर्दू साहित्य आपने पढ़ा हों। पूरानी गली-कूचों की खाक छानी हो। लम्बी बेहसों, भाषणों, धरनों में हिस्सा लिया हो। आपके पास बेलबोटम की पेंन्टें हो, कोई एक पुराना रेडियों, डाक टिकट, पूराने गीतों और किताबों का कलैक्शन हो। नाटक देखते भी हो, करते भी हो। क्या आप ऐसे है अगर नही तो इरफान तो ऐसे ही है। इतना सब होने के बाद ये पत्रकार भी है, अदबनवाज भी। आप देश के ख्यातीप्राप्त पत्रकारों में से एक है। ये वो ही पूराने वाले पत्रकार है जिनके पास बहुत सारे खादी के कुर्ते और एक झोला होता है, झोले में एक डायरी, दोपहर का खाना, पुराने खतोकिताबत और तेज नजर के साथ अपार ज्ञान होता हैं। इरफान भाई जितने मशहूर पत्रकार है, उतने ही शौहरतयाफ्ता ब्लागर भी हैं। एक जमाना हो गया इरफान को पत्रकारिता करते हुए हम जैसे कल के बच्चे तो दुनिया में पैदा भी ना हुए थे। जबसे इरफान भाई ने बोलना और लिखना शुरू किया है। रेडियों आप की नसों में खून की जगह बहता हैं। अगर आप पुराने रेडियों सूनने वाले है तो इरफान से जरूर वाकिफ होगे।
रेडियो के शौक ने आपके फन को निखारा और जमाने के सामने नई चीजों को पेश किया। इरफान बहुत शानदार पोस्टें लिखते है। बेहतरीन साहित्य आपके ब्लाग पर साउण्ड फार्मेट में आपको मिल सकता हैं। आज जब लोग ब्लाग पर जमकर फ्री की भाषणबाजी कर रहे है। ऐसे में इस आदमी ने भाषा के नायाब साहित्य को साउण्ड फार्मेट में कनवर्ट करके अपने ब्लाग पर डाला है। आप यहां पर कई सारी मशहूर कहानीयां, दूर्लभ इंटरव्यू, रोचक किस्से, बेशकिमती ना मिलने वाले गीत और जाने क्या-क्या अजग-गजब इरफान के ब्लाग पर मिल जाता हैं। इरफान शुरू से ही जमीन के आदमी रहे हैं, लेकिन बदलती दुनिया के मिजाज ने आपको भी मार्डन बना दिया हैं। आप अपना पूरा नाम इरफान सैय्यद मुहम्मद लिखते हैं और दिल्ली में रहते हैं। बतौर पेशेवर आप लिखने के साथ-साथ रेडियो ब्रॉडकास्टिंग से भी जुड़े हुए हैं। रामरोटीआलू आपका ईमेल पता हैं। आपके प्रंशसकांे में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की है। इरफान से आज भी लोग उनके फोटो की मांग करते हैं। इरफान को पूरानी चीजों से बेहद लगाव है चाहे वो कबाड़ ही क्यों ना हों। इरफान भाई जितना रेडियों पर सूने जाते है उतना ही अखबारो में पढ़े जाते हैं। आमतौर पर हिन्दी ब्लागिंग में मशहूर है कि इरफान भाई अपने ब्लाग टूटी हुई बिखरी हुई पर जो सुनाते हैंए जाने कहां से छांट छांट के लाते हैं। इरफान अपने दोस्तो में खासे मशहूर है उनके बारे में अजीज, पराशर सहाब का कहना है- इरफान साब अच्छे इनसान हैं, पिछले छह.सात महीनों से उनसे मुलाकात नहीं हुई है, अलबत्ता फोन पर गुफ्तगू कभी.कभी हो जाती है। पिछली मुलाकात श्रीराम सेंटर में हुई थी जहां तंजो.मिजा की दुनिया के बेताज बादशाह और मेरे अजीज मुज्तबा हुसैन साहब की किताबों की निंदा करते हुए वे उसे कबाड़ी को बेचने की बात कह रहे थे।
इरफान के लिए अपना ब्लाग लिखना जेहनी सुकून पहुंचाने का जरिया है और लोगों को अपनी पसंन्द की चीजों से अवगत कराने का। इसलिये आपकी पोस्टे औरो से अलग होती हैं, और इसी अलग के चक्कर में कई बार बड़ी फजीहत भी उठानी पड़ जाती हैं। पिछले दिनों आप अपनी एक पोस्ट ’’शील, अश्लील और पतनशील: कुछ टिप्स’’ के चलते विवादो में फंस गए थे। इस पोस्ट में नारी और पुरूष सम्बधों पर एक पुराणिक सन्दर्भ की बात कि गई थी। इस पोस्ट को लेकर अपने भड़ास भैय्या यशवंत तो इरफान भाई के पीछे ही पड़ गए थे उनका कहना था कि ’’ अगर औरते सर्वजनिक जीवन मे एक इंसान के बतौर सम्मान की मांग करे तो आपके जैसे वाम पंथियो को भी इस तरह के भय सताते है ’’ और उन्होने इसको लेकर एक मुहिम शुरू कर दी थी। जिसके चलते इरफान भाई को पोस्ट से सम्बधित कार्टून को हटाना पड़ा था। इस पर अपनी नीलीमा जी भी बहुत गरजी थी। आपने कहा- इरफान दादा ये क्या हुआ आपको ? इतने गर्तवान पातालगामी पतनशीलता के टिप्स ! और जाने दीजिए ये भाव विस्तारपरक चित्र कहां से मार लाए ? ये कुरुचिपूर्ण स्त्री विमर्श है या आपका आंतरिक भय या कि फिर आपका जेंडर ग्यान हाइपर हो गया है ????लेकिन इस पर दिनेशराय द्विवेदी जी की कुछ अलग ही राय थी आपने कहा कि इरफान भाई हम तो आप की इस पोस्ट को पढ़ कर आप के कायल हो गए। बात ऐसे की जाती है। उद्धरणों में क्या रखा है। अगर माँ की गाली वेद में लिखी होती तो क्या ब्रह्मवाक्य मान कर सिर पर लगा लेते क्या? आप ने बात भी कही और भाषा का भी निर्वाह किया। आप को बहुत बहुत बधाई।
इरफान जो कटैंट या सामग्री अपने ब्लाग पर रखते है उसके कापीराइट के बारे मे बहुत सजग दिखते है। कटैंट की मारामारी पर उन्होने एक बार कहा था कि- यह निवेदन ब्लॉग और इंटरनेट महारथियों से रवि रतलामी, श्रीश, अविनाश, देबाशीश, मैथिली, सागर नाहर और जीतू चौधरी सहित उन तमाम लोगों से है जिन्होंने हमें चोरी की राह पर ढकेला है। मैं भाई यूनुस, विमल वर्मा, पारुल, अशोक पांडे, प्रमोद सिंह और उन सभी मित्रों से आग्रह करता हूँ जो पूर्व प्रकाशित साहित्य और प्री.रेकॉर्डेड म्यूज़िक अपने ब्लॉग्स या साइट्स पर अपलोड करते हैंए वे बताएं कि क्या हम सब चोर हैं?
वैसे इरफान इन छोटी बातों और विवादो से परे है। वो अपनी मर्जी का ब्लाग चलाते हैं। उनके ब्लाग पर फैली विविधता को देखते हुए आपको उनकी पसन्द का कायल होना ही पड़ेगा। जो आदमी इतने जतन से चीज़ो को खोज-खोज कर ला रहा हो, उन्हे तराश रहा हो, सजा कर पेश करता हो तो वो किसी ब्लाग से ज्यादा एक धरोहर बन जाता है। इरफान यही काम कर रहे है। वह दूसरों को कुछ देने के लिए ब्लागगिंग कर रहे हैं। अभी बहुत दिनों से आपने कोई पोस्ट नही लिखी है। लेकिन अखबारो में लगातार लिख रहे है। आज जब हिन्दी में ब्लाग लगातार बढ़ रहे है। ऐसे में सार्थक और उपयोगी ब्लागों की संख्या बहुत कम है तब इरफान का टूटी हुई बिखरी हुई एक ताजगी का अहसास कराता हैं।
हर बार की तरह ही अतः मैं फिर कहूंगा कि ये तनकीद निगारी किसी जाति उद्देश्य या भावना से नही बल्कि उनके काम और लेखन पर एक विचार या राय भर है। अगली समीक्षात्मक पोस्ट मशहूर ब्लॉगर और नामचीन महिला पत्रकार मनविंदर भिम्बर ’’मेरे आस-पास’’ पर पढ़ना ना भूले।
इरफान के लिए अपना ब्लाग लिखना जेहनी सुकून पहुंचाने का जरिया है और लोगों को अपनी पसंन्द की चीजों से अवगत कराने का। इसलिये आपकी पोस्टे औरो से अलग होती हैं, और इसी अलग के चक्कर में कई बार बड़ी फजीहत भी उठानी पड़ जाती हैं। पिछले दिनों आप अपनी एक पोस्ट ’’शील, अश्लील और पतनशील: कुछ टिप्स’’ के चलते विवादो में फंस गए थे। इस पोस्ट में नारी और पुरूष सम्बधों पर एक पुराणिक सन्दर्भ की बात कि गई थी। इस पोस्ट को लेकर अपने भड़ास भैय्या यशवंत तो इरफान भाई के पीछे ही पड़ गए थे उनका कहना था कि ’’ अगर औरते सर्वजनिक जीवन मे एक इंसान के बतौर सम्मान की मांग करे तो आपके जैसे वाम पंथियो को भी इस तरह के भय सताते है ’’ और उन्होने इसको लेकर एक मुहिम शुरू कर दी थी। जिसके चलते इरफान भाई को पोस्ट से सम्बधित कार्टून को हटाना पड़ा था। इस पर अपनी नीलीमा जी भी बहुत गरजी थी। आपने कहा- इरफान दादा ये क्या हुआ आपको ? इतने गर्तवान पातालगामी पतनशीलता के टिप्स ! और जाने दीजिए ये भाव विस्तारपरक चित्र कहां से मार लाए ? ये कुरुचिपूर्ण स्त्री विमर्श है या आपका आंतरिक भय या कि फिर आपका जेंडर ग्यान हाइपर हो गया है ????लेकिन इस पर दिनेशराय द्विवेदी जी की कुछ अलग ही राय थी आपने कहा कि इरफान भाई हम तो आप की इस पोस्ट को पढ़ कर आप के कायल हो गए। बात ऐसे की जाती है। उद्धरणों में क्या रखा है। अगर माँ की गाली वेद में लिखी होती तो क्या ब्रह्मवाक्य मान कर सिर पर लगा लेते क्या? आप ने बात भी कही और भाषा का भी निर्वाह किया। आप को बहुत बहुत बधाई।
इरफान जो कटैंट या सामग्री अपने ब्लाग पर रखते है उसके कापीराइट के बारे मे बहुत सजग दिखते है। कटैंट की मारामारी पर उन्होने एक बार कहा था कि- यह निवेदन ब्लॉग और इंटरनेट महारथियों से रवि रतलामी, श्रीश, अविनाश, देबाशीश, मैथिली, सागर नाहर और जीतू चौधरी सहित उन तमाम लोगों से है जिन्होंने हमें चोरी की राह पर ढकेला है। मैं भाई यूनुस, विमल वर्मा, पारुल, अशोक पांडे, प्रमोद सिंह और उन सभी मित्रों से आग्रह करता हूँ जो पूर्व प्रकाशित साहित्य और प्री.रेकॉर्डेड म्यूज़िक अपने ब्लॉग्स या साइट्स पर अपलोड करते हैंए वे बताएं कि क्या हम सब चोर हैं?
वैसे इरफान इन छोटी बातों और विवादो से परे है। वो अपनी मर्जी का ब्लाग चलाते हैं। उनके ब्लाग पर फैली विविधता को देखते हुए आपको उनकी पसन्द का कायल होना ही पड़ेगा। जो आदमी इतने जतन से चीज़ो को खोज-खोज कर ला रहा हो, उन्हे तराश रहा हो, सजा कर पेश करता हो तो वो किसी ब्लाग से ज्यादा एक धरोहर बन जाता है। इरफान यही काम कर रहे है। वह दूसरों को कुछ देने के लिए ब्लागगिंग कर रहे हैं। अभी बहुत दिनों से आपने कोई पोस्ट नही लिखी है। लेकिन अखबारो में लगातार लिख रहे है। आज जब हिन्दी में ब्लाग लगातार बढ़ रहे है। ऐसे में सार्थक और उपयोगी ब्लागों की संख्या बहुत कम है तब इरफान का टूटी हुई बिखरी हुई एक ताजगी का अहसास कराता हैं।
हर बार की तरह ही अतः मैं फिर कहूंगा कि ये तनकीद निगारी किसी जाति उद्देश्य या भावना से नही बल्कि उनके काम और लेखन पर एक विचार या राय भर है। अगली समीक्षात्मक पोस्ट मशहूर ब्लॉगर और नामचीन महिला पत्रकार मनविंदर भिम्बर ’’मेरे आस-पास’’ पर पढ़ना ना भूले।
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