
आपने NDTV के लिए कई बेहतरीन और जोखिमभरी कवरेज को अजांम दिया है और लगातार नयी और सरचानात्मक उपलब्धियों को अपने खाते में दर्ज करती जा रही है। आप भीड़ में चुप नजर आती है, और अलग खड़ी होकर कोशिश करती है कि लोगों के ध्यान से बचे। ये भी उन कुछ चुनिंदा लोगों में से है जो चुपचाप अपने काम करने में यकीन रखते है। 18 अगस्त के दिन ही शायद ईश्वर कुछ बेहद अलग लोगों को बनाता है। गुलजार साहब भी इसी दिन नुमाया हुए थे। आपने भूगोल से मास्टर डिग्री ली और JNU से अपनी Ph।d। पूरी की। ’एशियन ऐज’ में शुरूआत करते हुए आपने पत्रकारिता में कदम रखा। शायद बहुत कम लोग जानते है कि नगमा ने आजतक के लिए एक मार्निग शो में बतौर एंकर भी काम किया है। नागापट्टनम में सूनामी की भंयकर त्रासदी, मुम्बई बम ब्लास्ट, इलाहाबाद का कुम्भ मेला, मेरठ का दर्दनाक विक्टोरिया पार्क आग कांड जैसी कुछ प्रसिद्ध टीवी कवरेजो के साथ नगमा के नाम की पहचान है। इसके अलावा और भी कई बेशूमार कार्यक्रमों से आपकी पहचान जोड़ी जाती है, और सलाम जिन्दगी शूरू करने के बाद तो आपने लोगों के ज़हन में एक नयी ही छाप छोड़ी है। सलाम जिन्दगी जैसे कार्यक्रम का अनूठा प्रस्तुतिकरण और आत्मियता तो खुद नगमा की ही सोच और व्यक्तित्व को रूबरू कराता है। जिसकी जगह आज लोगों के दिलों में है।
नगमा हमारे नये समाज का प्रतिनिधित्व करती है और बेहद सन्तूलित तरीके से अपनी जिन्दगी को जीती है। (सन्तुलित इसलिए कह रहा हूं कि वह अपने सर्किल में ही अपनी ख्वाहिशों को अजंाम देती है) नगमा के सामने अपना काम करते हुए जो सबसे बड़ा आर्दश किरदार सामने खड़ा है, वो बरखा दत्त का है। बरखा अपना शानदार सफर पूरा कर चूकी है लेकिन नगमा अभी अपने सूनहरे सफर के दौर में है। लेकिन उनको जाना कहा है ये ना नगमा जानती है ना कोई और। नगमा और बरखा का आपस में कोई लेना देना नही है बरखा बेहद आक्रमक है जबकि नगमा सोचने में समय लेती है। बरखा ने कभी किसी को अपने ऊपर हावी नही होने दिया है जबकि नगमा अक्सर सामने वाले के दबाव में आ जाती है। अभी हालिया दिल्ली 6 के प्रमोशन पर जब वह खुले बाजार में राकेश ओमप्रकाश, अभिषेक और सोनम से बात कर रही थी। तब उनका ये तनाव और दबाव आसानी से देखा जा सकता था। वह शायद किसी हद तक पोजसिव तो नही। खैर कोई बात नही।
नगमा की जिन्दगी तीन अन्य लोगो से बहूत मेच करती है। कंगना रनाउत, सोनिया जाफर, रिजवाना कश्यप। कंगना एक अदाकारा है, सोनिया एक डांसर है जबकि रिजवाना जिनको शमा के नाम से भी जाना जाता है एक काल्मनिस्ट है। ये तीनो बिल्कूल अलग लोग है और अलग-अलग काम करते है। लेकिन ये तीनों एक ही मिटटी के बने है। इनकी सोच और लाइफ स्टाइल बिल्कूल एक है। जिन्दगी को अपनी शर्तो पर जीने वाले लोग। बिदंस! जो चाहे वो करे, जैसे करे आपको क्या। नगमा के पास सलैक्टेड दोस्त है। आप चूप रहकर चीजो को विश्लेषण करती है और जो पसन्द आ जाए उसे किसी भी कीमत पर हासिल करती है। अगले तीन सालों के अन्दर आपको पत्रकारिता का एक बड़ा सम्मान और पदमश्री मिलना तय है। सलाम जिन्दगी के कुछ एपिसोड में बेहद बोल्ड सब्जैक्टस को उठाया गया है जिसको केवल नगमा ही कर सकती थी और कोई नही। ये मेरी बिल्कुल समझ नही आता है कि वह अपने माता-पिता से नफरत क्यों करती है। आप बिना शादी के बहूत खूश है। लिव इन रिलेशनश्ीाप पर आप एक कार्यक्रम भी बना चूकी है। भारत में अगर ऐसे लोग तलाश किए जाए जो बहूत ज्यादा और तेज मेकअप करते है तो नगमा का नम्बर यहां भी पहला ही होगा। आप बहूत डार्क मेकअप करती है जबकि ये उनको हल्का लगता है और अपना बहूत ख्याल रखती है क्योकि आपको दूसरो की परवाह है कि वो आपको देख रहे है। नगमा लापरवाह नही है लेकिन उनके पास कोई योजना भी नही है। NDTV के साथ अभी वे एक लम्बे समय तक रहने वाली है, NDTV में उनको एक आत्मियता नजर आती है। जो अन्य संस्थानों में ना के बराबर है। आने वाले समय में वह जरूर कुछ भाषणबाजी वाली किताबे लिखना चाहती है। लेकिन अभी समय नही है। ब्लाॅग के बारे में अभी तक उन्हे किसी ने नही बताया है जबकि खबरों से उन्हे इसके बारे में आम सी जानकारी है। नगमा की बचपन की दिली ख्वाहिश थी कि वह कुछ स्पेशल बने। फिल्मों में उनकी दिलचस्पी सिर्फ देखने में ही नही बल्कि काम करने और बनाने में भी है। (कुछ फोटो खीचाकर उन्होने अपने इस शौक को पूरा भी किया है) लेकिन अगर किसी ने काम का आॅफर किया तो वह शरमा जाएगी। हालांकि आमिर खान की फना मे एक छोटा सा रोल उन्होन बतौर नगमा ही किया है। बतौर कैरियर टीवी पत्रकारिता मे वह अगले 5 सालों तक जमी रहने वाली है लेकिन यदी वह प्राॅडक्शन हाउस खोलने में दिलचस्पी ले तो ये उनके लिए कही बेहतर विकल्प होगा। वह भारत की बेहद बोल्ड और बिंदास समाचार वाचिकाओं में से एक है जिसे वह बखूबी समझती है लेकिन जाहिर नही होने देती है।
अतः मैं फिर कहूंगा कि ये तनकीद निगारी किसी जाति उद्देश्य या भावना से नही बल्कि उनके काम और लेखन पर एक विचार या राय भर है। अगली समीक्षात्मक पोस्ट मशहूर ब्लॉगर इरफान ''टूटी हुई बिखरी हुई'' पर पढ़ना ना भूले। बहूत सारे मित्र अभी भी पूछ रहे है कि वह ब्लागिंग की पूस्तक कैसे प्राप्त कर सकते है ये बेहद आसान है दोस्तो आप एक मनीआर्डर रवि पाकेट बुक्स, 33 हरिनगर मेरठ शहर 250002 के नाम से भेजे आपको कुछ दिनो मे ही पुस्तक डाक द्वारा प्राप्त हो जाएगी। विशेष बात ये है कि सभी ब्लागर दोस्तो को पुस्तक बिना किसी डाक खर्च के भेजी जाएगी।