लो हो गया ब्लागिंग सेमिनार मेरठ में

मेरठ का पहला ब्लागिंग सेमिनार अपने पूरे जोशो-खरोश अन्दाज में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के प्रेमचंद सेमिनार हाल में किया गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो। एस. के. काक रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता मशहूर उर्दू आलोचक असलम जमशेदपुरी कर रहे थे।
कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ता के तौर पर सेमिनार का शुभारम्भ ’इर्द-गिर्द’ जैसा मशहूर ब्लाग चलाने वाले हरि जोशी जी से हुआ। हरि जोशी जी ने अपना वक्तव्य बहुत सादे अन्दाज से शुरू किया लेकिन जब वह मंच पर जम गए तब खूलकर हिन्दी ब्लागिंग पर बोले। उन्होने हिन्दी ब्लागिंग और परम्परागत् मीडिया के तरीको पर प्रकाश डाला साथ ही साथ अपने कुछ निजी अनुभवों का साझा भी किया। यहां एक बात में स्पष्ट तौर पर कहना चाहूंगा कि भारतीय पत्रकारिता के जिन चर्चित चेहरो को मैने व्यक्तिगत् तौर पर जाना है उनमे, प्रणव राय और राजदीप सरदेसाई अपना और दूसरो का बहुत ख्याल रखने वाले लोग है जो अपने ड्रेस सैंस और बाडी लैग्वेज को अपने व्यक्तित्व का अंग बना कर चलते है उनमे अब मैंने एक नाम हरि जोशी जी का भी जोड़ लिया हैं। सेमिनार में आप अपने डेशिंग और डायनेमिक अंदाज के कारण सब लोगो की निगाह में थे। अपना रखरखाव और बेहतर सलीके का प्रस्तुतिकरण सबको कहां आता है। हरि जोशी जी को जो भी लोग जानते है वह बखूबी समझते होगे कि वह पत्रकार कम और किसी कम्पनी के ब्रांड एम्बसेटर ज्यादा लगते है। वह अभी भी माडलिंग में अपना कैरियर बना सकते है।
आपके वक्तव्य के बाद सेमिनार की बागडोर ’भड़ास’ के यशवंत जी ने सम्भालीं। अपने जोरदार सम्बोधन और ठेठ अन्दाज में उन्होने अपनी बात शुरू की। हिन्दी ब्लागिंग का इतना जोरदार प्रतिनिधित्व करने वालो में, मैंने अभी तक कोई दूसरा व्यक्तित्व नही देखा। यशवंत जी झूमकर बोले और देर तक बोले। आपने ब्लागिंग को स्थानीयता से जोड़कर देखा और कहा- जिन खबरों को मुख्यधारा के मीडिया में जगह नही मिल पाती वह सभी खबरे ब्लाग के माध्यम से एक बड़ी पाठक संख्या तक पहूंच पाती है। आगे आपने ब्लागिंग और आर्थिक संसाधनों के एडंवास तरीको पर भी बात की। और बताया कि किस प्रकार से अब हिन्दी ब्लागर भी अच्छी आमदनी अपने ब्लाग के जरिये बना रहे है। इसके अलावा भी वह कई अन्य चर्चित मुद्दों पर भी जमकर बोले। आज के (11 फरवरी/स्थानीय) सभी अखबार यशवतं जी के ब्लागिंग पर दिए गए बयानो से भरे पड़े है। सेमिनार में आते ही यशवंत जी को पत्रकारों ने हाथो-हाथ लिया था। कार्यक्रम में बहुत सारे ब्लागर साथी अपने ब्लाग को चर्चित करने के तरीके भी यशवंत जी से पुछते रहे।
इसके बाद बेहद ही शर्मीली लेकिन अपने धारदार तेवर और सवेंदनात्मक लेखन के जरिये अपनी एक खास उपस्थिति को दर्ज कराने वाली भारत की चर्चित महिला पत्रकारों में से एक और मशहूर ब्लागर मनविंदर भिबंर जी कहा का की वह अभी ब्लागिंग की दुनिया में नई है लेकिन ब्लाग की अहमियत और असर क्या होता है आज ये सबको पता है। ब्लाग से उन सभी नये लिखने वालो का एक सार्थक मंच मिला है जो अच्छी लेखन क्षमता के बावजूद सामने नही आ पाए थे।
कार्यक्रम संचालन के लिए हमारे पास बहुत सारे नामों की एक लम्बी लिस्ट थी लेकिन आखिर में निर्णय ’हकबात’ सलीम अख्तर सिद्दीकी जी के पक्ष में गया। आपने प्रभावी तरीके से इस सेमिनार का संचालन किया और लोगों के सामने दिखाया कि वे एक अच्छे ब्लागर या पत्रकार ही नही बल्कि दक्ष संचालक की भूमिका भी खूब निभा सकते है। इस सेवा के लिए भी आप उनसे बिल्कुल सम्र्पक कर सकते है। वह बीच-बीच में ब्लागिंग के बारे में बताते हुए अपने पक्ष को भी सामने रख रहे थे।
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के लिए ऋचा जोशी जी भी थी। ऋचा जी के बारे मे हम सब जानते है कि आपको पत्रकारिता विरासत में मिली है। आपके पिताजी का नाम दिग्गज पत्रकारो की लिस्ट में शुमार है, और आपने ’इर्द-गिर्द’ से अपनी एक खास उपस्थिति को दर्ज किया है। इस ब्लागिंग के भव्य सेमिनार में अन्य बहुत सारे ब्लागर साथियों ने अपना-अपना पक्ष रखा। आमंत्रित ब्लागर और पत्रकार साथियों के नाम और उन्होने क्या-क्या कहा ये सब बताने के लिए ही आठ-दस कड़ियो में अपनी बात कहनी होगी। लेकिन मुख्य बात ये है कि इस समारोह में मुख्य रूप से भारत की पहली हिन्दी ब्लागिंग पुस्तक का विमोचन भी किया गया। आप सबको साथियो को पुस्तक सहज ही उपलब्ध हो सकती है इसके लिए आप सम्र्पक कर सकते हैं। कार्यक्रम में सभी दोस्तो ने चित्र लिए है। जो हमें अगले कुछ दिनों में उपलब्ध हो जाएगें जिसे अगली पोस्टो में प्रकाशित किया जाएगा।

20 comments:

अनिल कान्त : said...

आपके लेख से काफी लोगों के व्यक्तित्व के बारे में जानने को मिला शुक्रिया ...

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Anil Pusadkar said...

बधाई हो ।

संगीता पुरी said...

बधाई हो ..... ब्‍लागिंग सेमिनार के बारे में जानकर बहुत अच्‍छा लगा.....पुस्‍तक के बारे में भी जानकारी दें।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

अच्छा लगा जान कर इस ब्लागिंग सेमीनार के बारे में

Hari Joshi said...

इतना न चढ़ाइए इरशाद जी कि मैं पेड़ से भी उूपर निकल जाउं। जमीन का आदमी हूं, जमीन पर ही रहने दीजिए। आपकी पुस्‍तक पढ़ रहा हूं।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

saarthak samvaad ke lie badhai.

Irshad said...

ऐसी बात नही है गुरूजी, आपकी ये तस्वीर देखकर मैं भी सोच रहा था कि आप पुराने वाले (झोला बगल में लटकाए) पत्रकार होगे। लेकिन मेरा ये वहम जाता रहा। आपको लगता है कि मैं ऐसे ही कह रहा हूं तो एक क्रांस वोटिंग करवा लिजिए। मैं बहुमत से विजयी हो जाउंगा। पत्रकारिता के दौर में जो नए बदलाव आए है वह आपसे हम तक पहूंच रहे है।

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

अच्छा लगा जान कर इस ब्लागिंग सेमीनार के बारे में

योगेन्द्र मौदगिल said...

बधाई इरशाद भाई... इस आयोजन के लिये अगली कड़ी की प्रतीक्षा है....

अविनाश वाचस्पति said...

ब्‍लॉगिंग सेमिनार सफल रहा
और जानकर प्रसन्‍नता हुई
इसमें नर और नारी यानी
ब्‍लॉगिंग और पत्रकार बिरादरी
सभी मौजूद रहे।
चित्रों की रहेगी प्रतीक्षा।
सबको पुन: बधाई
पुस्‍तक कहां और कब
मिल सकेगी।

बवाल said...

बहुत बहुत बधाई भाईजान, मेरठ के ब्ला॓गिंग सेमिनार की। मन्विन्दर की शिरकत हमें बहुत उत्साहजनक लगी। और आपकी रिपोर्ट लाजवाब। जल्द तस्वीरों से भी रूबरू कराइएगा। इंतज़ार में।

Raviratlami said...

ब्लॉगिंग पर हिन्दी में पुस्तक! क्या बात है. जल्द बताइए कहां, कैसे मिलेगी.

अशोक मधुप said...

अच्छी जानकारी। एक अनुरोध हरि जोशी का फोटो शेसन करा दो,वो बढिया फोटो खींचूगा कि ऋचा जोशी भी नही पहचान पांएगीं।

manesh jain said...

wah ji maza aa gaya yeh sunkar..

mamta said...

इस ब्लागिंग सेमीनार की सफलता पर बधाई ।

फोटो का इंतजार रहेगा ।

Anonymous said...

इरशाद चढ़ा रहे हैं तो चढ़ जाइए न जोशी जी, हर्ज क्या है. दुनिया के छिनरा गोसाईं के मठ पर.

MANVINDER BHIMBER said...

इरशाद भाई ,
मैं जोशी जी की बात से सहमत हूँ , आपने हम लोगों को कुछ जियादा ही बता दिया है...अरे.....हम लोग तो जमीं के लोग है.....हमें वहीँ रहने दे आप ..... पुस्तक wastaw मे jaankaari से भरपूर है.....इसके लिए बधाई

अविनाश वाचस्पति said...

भरपूर है
मानते हैं, मानना ही पड़ेगा

पर जब दिल्‍ली दूर नहीं तो

पुस्‍तक क्‍यों अभी तक हमसे

इतनी दूर है

जबकि जानकारी भरपूर है।

Arvind Mishra said...

बधाई !

Anonymous said...

सेमीनार और पुस्‍तक के लिए बधाई। अब पुस्‍तक को ब्‍ला्ग पर चैप्‍टर बना कर डाल दीजिए और तस्‍वीरें दिखाइए।