हिन्दी ब्लॉगिंग के 10 सबसे बड़े खतरें

हिन्दी ब्लागिंग तेजी से अपने कदम बड़ा रही है, लेकिन कुछ ऐसी बातें भी हो जो सबसे लिये समस्या बनकर आयी है, प्रस्तुत है, ऐसी ही 10 बातें।

1-बेनामी एक ( anonymous) बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। ये जिधर चाहे मुंह मार देता है, कोई इसको रोकने-टोकने वाला नही है। इनको पकड़ने का अभी तक कोई पक्का इंतजाम नही है, ब्लॉगर आलोचना का स्वागत कर सकते है, लेकिन गालियों और बदतामिजी का नहीं। (बेनामी कोई और नहीं हैं, हम खुद ही चेहरा बदलकर एक-दूसरे को कोसते है)

2-हम लोग धड़ाधड़ लिखने पर उतारू हो गए है, लगातार पोस्टों पर पोस्टे दे रहे है, लेकिन सामूहिक रूप से हमारी फ्रिक ये बिल्कुल नही है कि हमें हमारे ब्लॉग से भी कुछ आमदनी होनी चाहिये, ये भी एक खतरा है, क्योकि अपने ब्लॉग पर हर कोई अपना बेस्ट देता है, जिसका उसे कुछ ना कुछ मेहनताना मिलना ही चाहिये।

3-लोगों को लिखने से मतलब, क्या लिखा, कुछ भी जो दिमाग में आया, फिर हम कहते है- अरे फलां का ब्लॉग बड़ा अच्छा चल रहा है, उस पर बहुत भीड़ रहती है, हमें अपने लेखन के जरिये अपने आप को ब्रांड में बदलना आना चाहिये। तभी हम अपना मजबूत पाठक वर्ग तैयार कर सकगें। (याद रखना ज्यादा टिप्पणीयां और प्रशंसक किसी के अच्छा लिखने की गांरटी नही है, बल्कि ये चापलूसी और टिप्पणी के बदले टिप्पणी वाला सिस्टम भी होता है।)

4. कुएं के मेढ़क बने रहना, हमेशा ही, प्रत्येक पोस्ट में एक सा लिखते रहना, चाहे वो सरकार को कोसना हो, हिन्दूव का ढोल पीटना हो, आंतकवाद की दुहाई हो। या इसके आस-पास जैसा कुछ। इससे बचे! ये आपके वातावरण और पालनपोषण को उजागर करता है।

5. ऐसे कई ब्लॉगर प्रकाश में आए है, जो तीन-तीन, चार-चार घटें के अतंराल से लगातार पोस्टे देते है। उनकी पोस्टों को पढ़ने वालो की कुल जमा-पूंजी चार या पांच लोग। (ये फिर भी बाज नही आते) ये एक दिन ब्लॉगिंग को फ्री से निकाल कर पैसों की करवाकर ही बाज आएगे।

6-सर्कीण मानसिकता वाले ब्लॉगरों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। धर्म को बचाने का ठेका इन्होने ही लिया हुआ है। अपनी घटिया बयानबाजी और एकतरफा लेखन से ब्लॉगिंग को प्रदूषित करने वाले ब्लॉगर भी बड़े खतरों में से एक है।

7- पुराने पुरोधाओं की गुम होती पहचान- अब तो काफी ब्लॉगर हो गए है, लेकिन कभी इस क्षेत्र के खिलाड़ी कोई और ही थे, एक ब्लॉगर जो पुणे में रहते है, तकनीकी विषेषज्ञ है, बड़ी गालियां बक रहे थे- हमने इतना कुछ किया हिन्दी ब्लॉगिंग को पहचान दिलायी, और आज हम ही गायब से हो गए। हमें इन लोगों को भी याद करना चाहिये, ये लोग भी हिन्दी ब्लॉगिंग के ब्लेक एण्ड व्हाइट दौर के नायक हुआ करते थे कभी।

8- अगर कोई किसी का मेटर उठा लेता है, तब हम क्या कर सकते है, ऐसा कोई प्रावधान नही है, क्योंकि यहां पर अधिकांशत लिखने वाले नॉन प्रोफेशनल है, कहीं छप नही पाए है, अगर आपके लेखन का कोई इस्तेमाल करे तो ये अच्छी बात है बशर्ते आपको भी उसका लाभ मिलना चाहिये।
9- कुछ सालों में ही हिन्दी ब्लॉगिंग की फिजा बदलने वाली है, दस-बीस हजार नही, लाखों की संख्या में ब्लॉगर लिख रहे होगे। आपका क्या होगा। कैसे टिकोगे, कभी सोचा है, अभी तो मजे की मिल रही है,

10- सबसे महत्वपूर्ण बात! आपने ब्लॉगिंग करते हुए किसी को क्या दिया। आप सिर्फ बकवास ही लिखते है, या कुछ बदलाव लाने वाला भी लिखते है, ऐसा कुछ जिसे पढ़कर पाठक प्रेरित हो, स्फुर्ति महसूस करे। (हिन्दी ब्लॉगिंग में अगर 13 हजार ब्लॉग है तो इनमें तीन प्रकार के ब्लॉग सर्वाधिक है, पहले वे लोग जो कविताए लिखते है, यहां कवियो और कवित्रियों की भरमार है, कविताएं भी ऐसी आदमी पढ़कर आत्महत्या की सोचने लगें। दूसरे जो सलाह देने वाले लोग है, देश ऐसे चलना चाहिये, नीतियां ऐसी होनी चाहिये, प्रधानमंत्री को ये करना चाहिये, इसने ये गलत कर दिया, मैंने ये सही कर दिया। दुनिया की सारी चिंताओं का हल इनके पास है, सिवा खुद के। तीसरे नम्बर पर वे ब्लॉगर सर्वाधिक है जो पत्रकार हुए जा रहे है, जिसको देखो वो यहां पत्रकार हुआ जाता है, अगर नही है, तो भी खुद को कहेगा जरूर। यहां क्या पत्रकारिता की डिग्रीयां बट रही है)

21 comments:

Ratan Singh Shekhawat said...

बढ़िया विश्लेषण |

Udan Tashtari said...

सही विश्लेषण किया है.

काशिफ़ आरिफ़/Kashif Arif said...

बहुत अच्छा विश्लेषण!

वैसे आप और हम किस श्रेणी मे आते है????

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत ही सटीक विश्लेषण किया है आपने इरशाद भाई . सच की कसौटी पर सौ प्रतिशत सही . आभार.

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

सोचने पर बाध्य करती पोस्ट।

अजय कुमार झा said...

मित्र ..कुछ बातों से सौ प्रतिशत सहमत हूँ ..कुछ से नहीं...अब तक ..जैसा की की मुझे इस ब्लॉग पर दिख रहा है की आपने कुल सत्ताईस पोस्टें लिखी हैं...इसमें कोई शक नहीं की ..इतने समय में आपने यहाँ के पूरे माहौल का खाका खींच कर रख दिया है...मगर सही मायनो में तो ब्लॉग्गिंग नाम ही isee का है...कोई बंधन नहीं..निर्बाध..कोई स्तर..नहीं ...कोई निश्चित दिशा नहीं...अजी हम एक ही देश के हैं ..इसलिए कम से कम मिजाज तो एक से हैं..अन्य भाषाओं की ब्लॉग्गिंग में तो पता नहीं क्या क्या हो रहा है..मैं ये नहीं कह रहा की गलत हो रहा है..मगर कुछ न कुछ तो वैसा है ही जो हम आप नहीं कर रहे हैं..कर भी नहीं सकते...रही पात ब्लॉग्गिंग से कमाने की..तो ये आपका सोचना है..और कुछ समय पहले तक मुझे भी लगता था..अब स्थिति वैसी नहीं है..और बहुत से लोग ..ज्यादा नहीं..मगर कम रहे हैं..हाँ आपके साथ मेरी भी दुआ है की हिंदी ब्लॉग्गिंग लाखों में पहुंचे..अभी अरब की जनसंक्या में भी हम सिर्फ हजार में हैं..आपकी लेखनी ने प्रभावित किया..और हाँ सबका अपना अपना क्षेत्र है भाई..और कविता तो पेड़ पौधे भी कर लेते हैं ..कभी सुन कर देखिएगा,....आभार..

बवाल said...

प्यारे भाईजान,
आप हमारी बात का कतई बुरा मत मानियेगा, मगर हमें आज आपकी बात से सौ फ़ीसदी इत्तेफ़ाक रखना ही पड़ रहा है। क्या बतलाएँ जी आपने बात ही इतनी सटीक कही है ।
मालिक आपको बड़ा रुतबा बक़्शे ।

venus kesari said...

पढ़ते सब है समझता कोई नहीं
हमें ही ले लीजिये हर १० १२ दिन में अपनी एक गजल ठेल देते हैं क्या हम ऐसा करना बंद करेंगे ...

बिलकुल नहीं

वीनस केसरी

shama said...

Irshad,
Mere vicharse ab v blogging shuru hogee...padhneke liye samay nikalnaa adhiktar logon ko mushkil hota jaa raha hai....chalte firte sun/dekh lena adhik prachalan me aayega..aapka vishleshan sahee hai..mai antarmukh hoke soshne lagee...maine khudko kahan sambhal lena chahiye yaa/sudhar lena chahiye...zaroor mashwara dena..

हिमांशु । Himanshu said...

विचारणीय प्रविष्टि । विश्लेषढ़ बढ़िया है ।

Vidhu said...

हमारे कई सवालों का जवाब है आपकी ये पोस्ट ...कुछ लोग वाकई मैं अच्छा लिख रहेंt हें .लेकिन धड़ल्ले से और उन पर जल्दबाजी मैं कमेंट्स भी नही कर पाते ...दुसरे मजबूत पाठक वर्ग तय्यार करना भी जरूरी है ..तीसरे कुँए के मेंढक बने रहने वाली बात सटीक है ..आभार बेबाक लेखन के लिए,

साहित्यालोचन said...

मेरे ब्लाग को किस केटेगरी में रखेंगे? जानने की लालसा है।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

विचारणीय पोस्ट.....उम्दा विश्लेष्ण!!

बी एस पाबला said...

क्या खतरे हैं :-)

Yayaver said...

इरशाद भाई, आपके मत से मुझे असहमति है. ब्लॉग पे लिखने का हर किसी को हक़ है. अच्छा या बुरा का निर्णय करने वाला यहाँ कोई नही है. समय से अच्छा आकलन करने वाला कोई नही होता है. जब विचारों का मंथन होगा, तब हम किसी नतीजे पे पहुँच पाएँगे. एको अहम् द्वित्यो नास्ति वाला राग अलापना ग़लत है. क्वालिटी और क्वांटिटी के लड़ाई तो हर क्षेत्र में है, यह ब्लॉग का क्षेत्र भी इसका अपवाद नही होगा. anonymous के समस्या आप ब्लॉगर में कुछ option चेंज क्र के बदल सकते हैं. अंत में बस इतना कहूँगा..to each his own
मेरा आपसे मतभेद है, मनभेद नहीं...

''ANYONAASTI '' {अन्योनास्ति} said...

इरशाद साहिब ,
विश्लेषण सही सटीक और समसामायिक है , पर आप के कुछ विचारों से इतिफाक नही रखता |

हर व्यक्ति अपने मन के ' गुबारों 'से घुट रहा है ,पढ़े लिखे लोगों के लिए ब्लॉग एक अच्छा माध्यम उपलब्ध है और जब से इन्टरनेट सेवाएं सस्ती एवं सर्व - सुलभ हुई और मिडिया में सेलीब्रिटिज के ब्लोग्स का जिक्र होना शुरू हुआ यह क्रेज और बढा है हो सकता हैं कल हमें मालूम हो कि इंटरनेट की ओर लोगों को आकर्षित करने हेतु यह एक पब्लिसिटी का शोशा मात्र था |

हर एक मन कविमन होता है , हर एक के अन्दर एक कथाकार या किस्सागो छुपा होता है | हर व्यक्ति एक अच्छा समालोचक होता है \और सभी अपने इर्दगिर्द एक रहस्यात्मक अभ मंडल देखा चाहता है |
एक व्यक्तिगत सवाल ,इमानदार जवाब चाहूँगा क्या आप सदैव अपना ईटीलेकचुएलटीज लादे लादे थकते नहीं क्या आप का मन कभी किसी भी व्यवस्था के लिए खीज कर नहीं कहता

उतार फेंको अपने ओढे हुए सारे भार,
नीचे हो धरती , ऊपर अनंत आकाश ,
भर सीने में सुबू की शबनमी हवाएं ,
जोर-जोर से चिल्लाएं हे हो , हे हो ,हे हो ||

???.........................................?????
खैर मैं आप का" धार्मिकता एवं सम्प्रदायिकता का अन्तर " पर की गयी टिप्पणी के बाद से ही कायल हूँ ; इसी लिए लिए कुछ फिर लाया हूँ हाँ इस बार भी ससामयिक तो है पर है बहुत हलकी फुलकी पर मेरी कोशिश तो है कि चोट गहरी करे बीच एक लम्बा अरसा अव्यवस्थित रहा परिवा र में और खानदान में कई मौतें देखीं कई दोस्त खोदिये ;बस किसी तरीके से सम्हलने की जद्दोजहद जारी है देखें :---
" स्वाइन - फ्लू और समलैंगिकता [पुरूष] के बहाने से " बताईयेगा कितना सफल रहा | हाँ मेरे सवाल का ज़वाब मेरे इ -मेल पर दे सकते है ,पर दें जरुर !!!!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

10 खतरों पर चिंतन:-
1 anonymous को भी खुश होने दो,.... फिर कोई अपना रास्ता बदले न बदले, मर्ज़ी उसकी.
२ नवभारत टाईम्स में एक देवी जी ने बताया है कि हिंदी के इक ब्लॉगर को एक लाख महीने की आमदनी हो रही है (पहले बेचारे महज़ 40 हज़ार रुपल्ली माहवार के पत्रकार थे, बकौल उसी लेखिका के ).
३ पाठक तो दिल्ली प्रेस की पत्रिकाओं के भी बहुत हैं, क्या नागार्जुन ने अपनी शैली बदल कर उनमें लिखा (!), भाई उम्मीद है कि मेरी टिपण्णी को चापलूसी न मानेंगे आप :-)
४ ओह, मुझे लगता था कि लेखक गिरगिट नहीं होते, शायद इसी लिए अपनी शैली में ही लिखते रहते होंगे.
५ ३-४ घंटे में पोस्ट ठोकते रहना भी कहाँ आसन है....ईमेल पैसे से मुफ्त हो गयी..ब्लॉग्गिंग पैसे खर्च कराएगी (?)..ह्म्म्म अभी लगता नहीं.
६ जिसकी जैसी ढपली, वैसा राग.घटिया राग सुनकर, लोग भाग जाते हैं.
७ सभी दिलीप कुमार, देवानंद और अमिताभ बच्चन नहीं हो सकते, नए खान आयेंगे ही...हाँ तसल्ली इस बात पर हो सकती है कि आज के ब्लॉग्गिंग हीरो भी कल पुणे ठेल दिए जायेंगे.
८ मुफ्त खोरों का कोई कुछ नहीं कर सकता, कौन माथा फोड़े, निर्मल वर्मा की रोयल्टी तक को तो प्रकाशक पी गए, ब्लॉगर तो गरीब की जोरू है.
९ आगे भी भगवन भली करेगा.
१० सही लिखा है आपने, इसीलिए तो भड़ास नमक ब्लॉग भी हैं यहाँ. भडास काहे न निकाली जाये, यही तो स्वच्छंदता है.

प्रवीण जाखड़ said...

इरशाद भाई क्या लाजवाब लिखा आपने। आपको जानकर दिलचस्प लगेगा कि रात के बारह-एक बजे जितने हिंदी ब्लॉगर्स पोस्ट डालते हैं, उनमें से 90 फीसदी से ज्यादा तो कवि और शायर ही होते हैं। मैंने अमरीकी हमले की लगातार एक्सक्लूसिव छह कडिय़ां रात को इसी वक्त पोस्ट की थी। छह के छह दिन जैसे ही मैं चिट्ठाजगत पर जाता, ये कविता लिखने वाले तो मन, दिल, दिमाग सबकी वाट ही लगा देते थे।
कवित आहत से भी बड़े आहती हैं, ये ब्लॉगर्स। हमारे ही भाई हैं, पर क्या कविता रचते हैं, लगता है जैसे कविता कंप्यूटर स्क्रीन फाड़ कर बाहर आ जाएगी।
पर वाकई दिलचस्प लिखा आपने।

श्रद्धा जैन said...

bahut uchit samay par gahra vishleshan aur bahut sateek shabdon ka pryog

Anonymous said...

aap aur kya kar rahe hai fir :P

सुलभ सतरंगी said...

हमें किसी से कोई शिकायत नहीं है. हम तो शौकिया लिखते हैं. एक सलाह यही देना चाहूँगा की ब्लॉग्गिंग में मजा तभी है जब आप के पास जीविका चलाने का कोई अन्य साधन मौजूद है. कम से कम बेरोजगारों के लिए ब्लॉग्गिंग करना बहुत दर्द भरा है.